लोक शिक्षक मंच दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के उस आदेश की कड़ी निंदा करता है जिसे औपचारिक रूप से अब तक जारी नहीं किया गया है मगर जिसके तहत सीएम श्री स्कूलों के शिक्षकों व विद्यार्थियों को 17 सितंबर की शाम 6 से 7/8 बजे के बीच स्कूल में उपस्थित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 'आशीर्वाद' के दिए जलाने को कहा जा रहा है। संभावित विरोध के मद्देनज़र ही शायद स्कूलों में ली गई बैठकों में इस बेशर्मी को यह धूर्त जामा पहनाकर परोसा गया कि उस दिन सीएम श्री स्कूलों का भी 'जन्मदिन' है! औपचारिक आदेश जारी न करने या अंतिम समय पर जारी करने का तिकड़म भी संभवतः फ़ज़ीहत व जनता के रोष से बचने की ही एक नाकाम चाल है। इस आयोजन के लिए विभाग द्वारा स्कूलों को दिए, तेल व बाती उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।
इस आदेश ने स्कूलों में राजनीतिक हस्तक्षेप की क्षुद्रता, तानाशाही व चाटुकारिता की ऐसी मिसाल पेश की है कि किसी भी सामान्य बुद्धि वाले व्यक्ति के लिए इसका समर्थन करना तो दूर, इसका बचाव करना भी बेहद शर्मसार करने वाला विचार है। हम इसका विरोध करने के कारणों का हवाला देने की भी ज़रूरत महसूस नहीं करते। ऐसे बेहूदा आदेश का विरोध करने के पक्ष में तर्क देना भी शिक्षकों की बुद्धिमता, विवेक व आत्मसम्मान की तौहीन होगी।
लोक शिक्षक मंच दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग से तत्काल इस आदेश को वापस लेने की माँग करते हुए शिक्षक साथियों से इसका पालन न करने की अपील करता है।
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