लोक शिक्षक मंच उन तमाम राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के शिक्षा विभागों तथा ऐसे सभी शिक्षा संस्थानों के उन आदेशों की कड़ी निंदा करता है जिनके तहत कर्मियों, शिक्षकों व विद्यार्थियों को 17 सितंबर की शाम 6 से 7/8 बजे के बीच शिक्षा परिसर में उपस्थित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 'आशीर्वाद' के दीये जलाने को कहा गया था। इस संबंध में समय पूर्व औपचारिक आदेश जारी न करने और फिर अंतिम समय पर अनर्गल व आँखों-ही-आँखों में इशारा करने वाले आदेश जारी करने का अंततः नाकाम उद्देश्य फ़ज़ीहत व जनता के रोष से बचना ही था। निर्लज्ज, अमर्यादित व पाखंडी सत्ता के तमाम कीर्तिमान ध्वस्त करते हुए, इस आयोजन के लिए शिक्षा विभागों द्वारा राजकीय कोष से दीये, तेल व बाती उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई थी। शिक्षा संस्थानों, शिक्षकों, विद्यार्थियों व अन्य कर्मियों के समय, ऊर्जा तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता की जो जबरन बलि ली गई, वो अपने आप में एक आपातकालीन प्रशासन के एक और घृणित उदाहरण के रूप में इतिहास में दर्ज होगा।
Monday, 21 September 2026
इस खुले झूठ को, ज़हन की लूट को ............हम नहीं मानते, हम नहीं जानते!
Wednesday, 16 September 2026
शिक्षा विभाग, शर्म करो! !!!!! 17 सितंबर को स्कूलों में दिए जलाने वाला आदेश ख़ारिज करो!
लोक शिक्षक मंच दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के उस आदेश की कड़ी निंदा करता है जिसे औपचारिक रूप से अब तक जारी नहीं किया गया है मगर जिसके तहत सीएम श्री स्कूलों के शिक्षकों व विद्यार्थियों को 17 सितंबर की शाम 6 से 7/8 बजे के बीच स्कूल में उपस्थित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 'आशीर्वाद' के दिए जलाने को कहा जा रहा है। संभावित विरोध के मद्देनज़र ही शायद स्कूलों में ली गई बैठकों में इस बेशर्मी को यह धूर्त जामा पहनाकर परोसा गया कि उस दिन सीएम श्री स्कूलों का भी 'जन्मदिन' है! औपचारिक आदेश जारी न करने या अंतिम समय पर जारी करने का तिकड़म भी संभवतः फ़ज़ीहत व जनता के रोष से बचने की ही एक नाकाम चाल है। इस आयोजन के लिए विभाग द्वारा स्कूलों को दिए, तेल व बाती उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।
Thursday, 10 September 2026
We reject the whimsical diktat to close educational institutions in the name of BRICS Summit!
Lok Shikshak Manch condemns the arbitrary and anti-people closure of educational institutions in Delhi, especially public schools run by the DoE and MCD, on Friday, 11th September. This autocratic denial of education is a clear indication of how the interests of the rulers are totally opposed to those of the working classes. It is possible that this enforced closure of all public institutions in Delhi in the name of the BRICS Summit has been devised to give a hint to the better-off salaried class to leave the city for an extended weekend vacation so as to present a less cluttered picture of the capital. It is equally possible that this closure is another sign of that megalomania of the rulers which forces the common people to suffer the effects of its derangement.