Monday, 11 January 2016

कविता: नेल पॉलिश वाली बच्ची

राजेश आज़ाद
प्राथमिक अध्यापक 
स्कूल में पाँचवीं कक्षा की एक बच्ची से
डाँटते हुए पूछा मैंने
उसके नाखूनों पर लगे
नेल पॉलिश का कारण
वो थोड़ा शरमाई-सकुचाई
फिर बोली, ये नेल पॉलिश नहीं
चूड़ी पर सितारे लगाने के बाद
लगी रह जाती है गोंद नाखूनों पर ।
इस सितारे लगाने के मिलते हैं
उसे एक बॉक्स के बीस रुपए
एक बॉक्स चूड़ियाँ बनाने में
लग जाता है पूरा दिन ।
फिर पूरे आत्मविश्वास के साथ
उसने बताया  
चुड़ियाँ बनाने के बाद वो होमवर्क
करके ही सोती है ।
आँखें उसकी कमजोर हैं
कक्षा में बोर्ड पे लिखा
दिखता है उसे धुंधला
उसे लगता है कि देखती है टीवी ज्यादा ।
बीस रुपए में से पाँच की
खाती है रोज़ वो चीज
दस रुपए स्कूल आने पर खर्च करती है
और बाकी के पाँच रुपए
वो जमा कर रही है
अपने जन्मदिन के लिए
खरीदेगी एक जींस
देगी अपने दोस्तों को पार्टी
और सर को एक चॉकलेट । 


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